डॉक्टरों की गलती से 10 दिन की मासूम से उसकी मां छीन गई

डॉक्टरों की गलती से 10 दिन की मासूम से उसकी मां छीन गई

10 दिन की मासूम से डॉक्टरों की गलती से उसकी मां छीन गई। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, यह महिला के परिजन का आरोप है।

भागलपुर के भ्रमरपुर निवासी अभिनन्दन ठाकुर की पत्नी सोनी ठाकुर गर्भवती थी। नारायणपुर के मदर्स हेल्थ केयर अस्पताल में सिजेरियन पद्धति से बच्चे का जन्म हुआ लेकिन लगातार रक्तस्राव होने के कारण सोनी का ब्लड सैंपल टेस्ट कराया गया जहां उसका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव बताया गया। उसके बाद तबीयत बिगड़ने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें भागलपुर जीरोमाइल स्थित मेडीलाइफ अस्पताल में रेफर कर दिया।

मेडीलाइफ अस्पताल में दोबारा उसका ऑपरेशन हुआ डॉक्टरों ने ब्लड के लिए लिखा और मेडी लाइफ ने हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक को सैंपल भेज टेस्ट कराया। जहां उसका ब्लड ग्रुप एबी पॉजिटिव बताया गया। फिर मेडीलाइफ के डॉक्टरों ने मायागंज अस्पताल के ब्लड बैंक में सैंपल भेजा जहां उसका सैंपल टेस्ट कर एबी पॉजिटिव बताया गया। मेडीलाइफ अस्पताल के डॉक्टरों ने अपने यहां ब्लड टेस्ट एंटीबॉडी टेस्ट किये बिना महिला को ब्लड चढ़ा दिया। इसके बाद महिला की तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। 7 मई को महिला को पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया। परिजनों ने पटना के प्राइवेट लैब एंप्लीकान डायग्नोस्टिक रिसर्च सेंटर में ब्लड टेस्ट करवाया जहां उनका ग्रुप बी पॉजिटिव बताया गया। इस दौरान महिला के शरीर में दिया गया ब्लड काम नहीं करने लगा। दुखद सोनी की मौत हो गई।

बकायदा पीएमसीएच ने डेथ सर्टिफिकेट भी दिया। महिला को 4 वर्ष का एक बेटा था वह 10 दिन पहले उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया था। लेकिन बड़ी लापरवाही के कारण बच्चे अनाथ हो गए , मासूम ने अपनी मां को देखा तक नहीं। सोनी के पति अभिनंदन ठाकुर ने कहा कि मेडीलाइफ अस्पताल ने बच्चों को अनाथ कर दिया। जब बी पॉजिटिव ब्लड था तो एबी पॉजिटिव क्यों चढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन से मांग है कि इसकी जांच का ठोस कार्यवाही करें ताकि आगे कोई बच्चा अनाथ ना हो।

वहीं इस मामले में मेडीलाइफ कर डायरेक्टर डॉ जितेंद्र ने कहा कि हमारे यहां सोनी ठाकुर को भर्ती कराया गया था। सैंपल लेकर हमने हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक भेजा। वहां एबी पॉजिटिव आया फिर मायागंज अस्पताल भेजा वहां भी एबी पॉजिटिव आया वही ब्लड चढ़ाया गया। डॉ जितेंद्र ने कहा कि इंफेक्शन 64000 हो गया था लेकिन हेल्थ केयर डायग्नोस्टिक के रिपोर्ट के अनुसार डब्ल्यूबीसी काउंट 64 हजार था। डॉक्टर ने कहा कि अगर गलत ब्लड के जाने के कारण मौत होती तो 100ml चढ़ते ही मौत हो जाती। ब्लड ग्रुप सही था।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि मेडिलाइफ अस्पताल में में जो ब्लड गया उसे वहां ब्लड टेस्ट व एंटीबाडी टेस्ट किए बगैर महिला को कैसे चढ़ाया गया। इस मामले में सोमवार को महिला के परिजन पुलिस प्रशासन को आवेदन देने की बात कही है।

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